लोगों के इस कारवां से मेरा क्या हैं वास्ता,
मेरी अपनी मन्जिले हैं, मेरा अपना रास्ता ।
ऊब चुका हूँ दुनिया के सब घिसे पिटे फसानों से,
मैं लाया हूँ नया फसाना, नया ही अन्दाजे बयां ।
इन्तजाम ए ताजगी. कोई भी करता नहीं,
जबकि सबही मानते हैं, बीमार है आबोहवा ।
मेरी अपनी मन्जिले हैं, मेरा अपना रास्ता ।
तेजी से कम हो रही हैं शहर की खूबसूरती,
उनको आता है नजर तो सिर्फ अपना आशियां ।
कोई माने या ना माने लेकिन ये है कायदा,
गम का नाम ही जिंदगी है और खुशी इक हादसा ।
मेरी अपनी मन्जिले हैं, मेरा अपना रास्ता ।
गम को सीने से लगा लो, खुशियाँ आने-जाने दो,
राह देखते ही जिये तो जीने से क्या फायदा ।
साथ गुजरते वक्त के सिलसिले हो जाएँगे
वो कोई मुश्किल नहीं हैं, बस करनी हैं इफ्तदा ।
मेरी अपनी मन्जिले हैं, मेरा अपना रास्ता ।
कहते हैं इक से भले दो, आसां सफर हो जाता हैं,
ए खुदा वो हम सफर दे, जो दे मुझको हौसला
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